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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भारत-पाक सीमा पर पहुंचे: सीमा सुरक्षा और सेना सुधार पर जोर, जैसलमेर में आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में होंगे शामिल
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भारत-पाक सीमा पर पहुंचे: सीमा सुरक्षा और सेना सुधार पर जोर, जैसलमेर में आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में होंगे शामिल

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार शाम 6 बजे राजस्थान के जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेंगे. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पश्चिमी सीमा पर उनका यह दो दिवसीय दौरा बेहद खास माना जा रहा है. रक्षा मंत्री पहले आर्मी स्टेशन जाएंगे जहां वे आर्मी वॉर म्यूजियम का दौरा करेंगे. इसके साथ ही एक नए ‘लाइट एंड साउंड शो’ का उद्घाटन भी करेंगे. इस दौरान वे भारतीय सेना के जांबाज जवानों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाएंगे

 

दरअसल, गुरुवार 23 से 25 अक्टूबर, यानी तीन दिन तक आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस जैसलमेर में होने जा रही है। इसमें हिस्सा लेने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि इसमें अग्निवीरों की सर्विस 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत की जा सकती है। इस कॉन्फ्रेंस में वे सेना के अधिकारियों के साथ देश की सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे। बताया जा रहा है कि इस दौरान वे लोंगेवाला में जवानों से भी बातचीत करेंगे। तीन दिन चलने वाली इस कॉन्फ्रेंस में देश की सीमाओं की मौजूदा स्थिति, तकनीकी बदलावों और आने वाले वर्षों में सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के मुद्दों पर विचार किया जाएगा। .

दौरे के दूसरे दिन राजनाथ सिंह तनोट माता मंदिर में दर्शन करेंगे और सीमा चौकी का जायजा लेंगे. इसके बाद वे लोंगेवाला जाएंगे जहां 1971 के युद्ध में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देंगे. लोंगेवाला में वे करीब एक घंटे तक रहेंगे. यह दौरा सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.आर्मी

रक्षा मंत्री का यह दौरा भारत-पाक सीमा की सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से अहम है. इस दौरे से भारतीय सेना की नई दिशा और दृष्टि तय होगी जो आने वाले वर्षों में देश की रक्षा को और मजबूती देगी

अग्निवीरों की सेवा बढ़ाने पर होगा मंथन

थलसेना के उच्च अधिकारियों का वार्षिक आर्मी कमांडर्स सम्मेलन इस बार सीमांत जिले जैसलमेर में आयोजित किया जा रहा है। यह बैठक कई दृष्टियों से विशेष मानी जा रही है, क्योंकि इसमें देश की सैन्य नीति से जुड़े कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं। सबसे प्रमुख चर्चा का विषय अग्निवीर योजना में स्थायी नियुक्ति दर बढ़ाने से जुड़ा है। वर्तमान में केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल की सेवा के बाद स्थायी किया जाता है, जबकि अब इसे बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव रखा गया है।

सूत्रों के अनुसार, अग्निवीर योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के जवान अगले वर्ष अपनी चार वर्षीय सेवा पूरी करेंगे। ऐसे में उनकी पुनर्नियुक्ति और भविष्य की योजना तय करने को लेकर यह बैठक निर्णायक साबित हो सकती है। रक्षा मंत्रालय इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि अधिक संख्या में प्रशिक्षित अग्निवीरों को सेना में स्थायी अवसर मिले ताकि उनके अनुभव और दक्षता का उपयोग देश की सुरक्षा में और बेहतर ढंग से किया जा सके।

जैसलमेर सम्मेलन में सेना की ऑपरेशनल तैयारियों की भी व्यापक समीक्षा होगी। इसमें क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत और प्रतिस्थापन, आवश्यक सैन्य सामग्रियों की आपात खरीद, गोला-बारूद और हथियार प्रणालियों के भंडारण की स्थिति जैसे विषय शामिल होंगे। साथ ही, मिशन सुदर्शन चक्र के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी, जो तीनों सेनाओं और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण मिशन है।

पहली बार बॉर्डर पर आयोजित हो रही बड़ी बैठक।

पहली बार ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ी बैठक

यह सम्मेलन मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना कमांडरों की पहली बड़ी बैठक है। इससे पहले इसी माह दिल्ली में सम्मेलन का पहला चरण आयोजित किया गया था। जैसलमेर बैठक इस वर्ष की दूसरी आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का दूसरा चरण है। यह बैठक सेना के शीर्ष नेतृत्व को वर्तमान सुरक्षा स्थिति, उभरती चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर गहन चर्चा का अवसर प्रदान करेगी। रक्षा मंत्री की यात्रा को लेकर जैसलमेर प्रशासन और सेना ने मिलकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। एयरपोर्ट से लेकर कॉन्फ्रेंस स्थल तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर में ट्रैफिक रूट भी अस्थायी रूप से बदले जा सकते हैं।

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