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फलोदी: “वंदे मातरम्” की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर पर सामूहिक वंदे मातरम् गान
फलोदी: “वंदे मातरम्” की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर पर सामूहिक वंदे मातरम् गान

फलोदी/ स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में भारतीय राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के सभी विद्यार्थियों ने पूर्ण श्रद्धा और जोश के साथ एक स्वर में “वंदे मातरम्” का सामूहिक गायन किया। इससे विद्यालय परिसर देशभक्ति के भाव से गूंज उठा।

कार्यक्रम में व्याख्याता विशंभर थानवी ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की पुकार है। यह सृष्टि के बीज मंत्र का मर्म, वीरों के बलिदान की हुंकार और राम के वनवास का काव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों को गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसके राष्ट्रगीत बनने की यात्रा और राष्ट्रीय आंदोलन में इसकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। थानवी ने यह भी उल्लेख किया कि “वंदे मातरम्” पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था, जिसके बाद यह राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन गया।

कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के शिक्षकगण आसुराम परिहार, नरेंद्र शर्मा, प्रेमाराम बिश्नोई, शैतान सिंह राजपुरोहित, सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित, पोलाराम लावा, फतेह राज पुरोहित, अमिला चौधरी, जेठाराम, वासुदेव गर्ग, मनोहर सिंह राजपुरोहित, संजय मीणा, विक्रम रामावत, पूजा सोलंकी, महिपाल सिंह, शुभम सोनी और सुरजीत सिंह उपस्थित रहे।

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