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सुमेरपुर के बीच बाजार में पटाखा दुकानें क्यों? जनहित मंच ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र, लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों की जांच की मांग; एक-दो दिन में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी
सुमेरपुर के बीच बाजार में पटाखा दुकानें क्यों? जनहित मंच ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र, लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों की जांच की मांग; एक-दो दिन में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और विस्फोटक नियमों के पालन पर सवाल; हादसा हुआ तो जिम्मेदारी कौन लेगा—कलेक्टर, SDM या सत्यापन करने वाले अधिकारी? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

सुमेरपुर (पाली), 27 अक्टूबर 2026। दीपावली से पहले सुमेरपुर शहर के मुख्य बाजार में पटाखा दुकानों के संचालन और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सुमेरपुर नागरिक सुरक्षा एवं जनहित मंच के संस्थापक एवं सचिव सोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चार पृष्ठों का जनहित प्रार्थना पत्र भेजकर घनी आबादी वाले मुख्य बाजार से पटाखा दुकानों को शहर के बाहर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करवाने और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

प्रार्थना पत्र में सुमेरपुर के भैरू चौक से गांधी मूर्ति तक के मुख्य बाजार की स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि यह क्षेत्र अत्यंत व्यस्त है। यहां व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ आवासीय भवन भी स्थित हैं। आसपास के गांवों से भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और अन्य कार्यों के लिए पहुंचते हैं।

ऐसे क्षेत्र में पटाखों की बिक्री और भंडारण से संभावित अग्निकांड का खतरा बताते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और सुरक्षा नियमों के बावजूद अनुमति किस आधार पर?

देश में पटाखों की बिक्री एवं भंडारण के लिए विस्फोटक नियम, 2008 के तहत सुरक्षा संबंधी प्रावधान लागू हैं। सुप्रीम कोर्ट भी पटाखों की बिक्री में लागू सुरक्षा नियमों के पालन पर जोर दे चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि सुमेरपुर के घनी आबादी वाले मुख्य बाजार में पटाखा दुकानों को अनुमति देने से पहले क्या निर्धारित सुरक्षा मानकों की जांच की गई?

क्या दुकानों के बीच आवश्यक दूरी, आसपास के आवासीय भवनों, अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन वाहनों के आवागमन की परिस्थितियों का वास्तविक निरीक्षण किया गया?

यदि सभी नियमों का पालन हुआ है, तो प्रशासन लाइसेंस जारी करने से पहले तैयार की गई निरीक्षण रिपोर्ट और सुरक्षा संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं करता?

सुमेरपुर नागरिक सुरक्षा एवं जनहित मंच (2)

एक-दो दिन में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेगा संगठन : सोहन सिंह

सुमेरपुर नागरिक सुरक्षा एवं जनहित मंच के संस्थापक एवं सचिव सोहन सिंह ने बताया कि शहर के घनी आबादी वाले मुख्य बाजार में पटाखा दुकानों के संचालन और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर संगठन अब न्यायालय की शरण लेने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन आम जनता की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाता है, तो संगठन आगामी एक-दो दिनों में राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेगा।

सोहन सिंह ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यापारी के व्यवसाय को रोकना नहीं, बल्कि शहर के नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने मांग की कि पटाखा दुकानों को शहर से बाहर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए तथा लाइसेंस जारी करने वाले और सुरक्षा सत्यापन करने वाले अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा है?

सोहन सिंह ने उठाया अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा

प्रधानमंत्री को भेजे गए प्रार्थना पत्र में सोहन सिंह ने वर्तमान एवं पूर्व वर्षों में जारी पटाखा बिक्री और भंडारण संबंधी लाइसेंसों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि लाइसेंस जारी करने से पहले संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण, सुरक्षा परीक्षण और जांच रिपोर्ट का सत्यापन कराया जाए।

यदि बिना समुचित जांच या सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए लाइसेंस जारी किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित कर नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए।

हर साल ‘अगले वर्ष शहर से बाहर’ का आश्वासन, फिर वही बाजार क्यों?

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि पटाखा दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने की मांग के बावजूद मुख्य बाजार में ही दुकानें लगाने की स्थिति क्यों बनती है। हर वर्ष यह कहे जाने की बात सामने आती है कि इस बार दुकानें लगाने दी जाएं, अगले वर्ष शहर से बाहर व्यवस्था कर दी जाएगी।

आखिर वह अगला वर्ष कब आएगा? क्या शहर के बाहर सुरक्षित पटाखा बाजार निर्धारित करने के लिए प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

यदि पूर्व में ऐसे आश्वासन दिए गए थे, तो उन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? प्रशासन को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

लाइसेंस प्रक्रिया में मिलीभगत की आशंका की भी हो जांच

सबसे गंभीर सवाल लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ा है। यदि किसी दुकान का स्थान निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो उसके लिए अनुमति कैसे जारी हुई? क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जाकर वास्तविक निरीक्षण किया या केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस जारी किए गए?

यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही होगी या अनुमति प्रक्रिया में किसी स्तर पर मिलीभगत भी हुई है? ऐसी आशंकाओं का समाधान लाइसेंस फाइलों, निरीक्षण रिपोर्टों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच से ही हो सकता है।

हादसा हुआ तो जिम्मेदारी कौन लेगा?

सुमेरपुर के मुख्य बाजार में बड़ी संख्या में व्यापारी, कर्मचारी, महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले नागरिक मौजूद रहते हैं। ऐसे में यदि पटाखों के कारण कोई गंभीर अग्निकांड होता है, तो नुकसान केवल संबंधित दुकान तक सीमित रहने की गारंटी नहीं है।

क्या जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी, लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारी और सत्यापन में शामिल पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी, यदि जांच में उनकी लापरवाही सामने आती है? किसी हादसे के बाद जांच कमेटी बनाने से बेहतर है कि प्रशासन अभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करे।

आसपास के मकानों और गोदामों में भंडारण की भी जांच की मांग

सोहन सिंह ने प्रधानमंत्री को भेजे प्रार्थना पत्र में मुख्य बाजार के आसपास स्थित भवनों, कमरों और गोदामों में पटाखों के संभावित अनधिकृत भंडारण की आशंका भी जताई है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे संभावित भंडारण स्थलों की आकस्मिक जांच करवाई जाए और अवैध भंडारण पाए जाने पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।

प्रधानमंत्री से की सात प्रमुख मांगें

प्रार्थना पत्र में मुख्य बाजार और आवासीय क्षेत्रों से पटाखा दुकानों को शहर के बाहर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने, वर्तमान एवं पूर्व वर्षों के लाइसेंसों की उच्चस्तरीय जांच, स्थलीय निरीक्षण और सुरक्षा रिपोर्टों का सत्यापन, लापरवाही साबित होने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, संभावित अनधिकृत भंडारण की जांच, स्थायी सुरक्षित पटाखा बाजार निर्धारित करने तथा समयबद्ध कार्रवाई की लिखित रिपोर्ट उपलब्ध करवाने की मांग की गई है।

इस पत्र की प्रतिलिपि राजस्थान के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पाली जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, सुमेरपुर उपखंड अधिकारी और नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी को भी संबोधित की गई है।

जिला प्रशासन से सात सीधे सवाल

  1. सुमेरपुर के मुख्य बाजार में इस वर्ष कितनी पटाखा दुकानों को लाइसेंस जारी किए गए और अनुमति किस अधिकारी ने दी?
  2. प्रत्येक दुकान का वास्तविक स्थलीय निरीक्षण किस अधिकारी ने किया?
  3. क्या पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित विभागों की सुरक्षा रिपोर्ट प्राप्त की गई?
  4. क्या लाइसेंस जारी करते समय बाजार की भीड़, संकरी सड़कें, आसपास के मकान और आपातकालीन निकासी का परीक्षण किया गया?
  5. यदि पूर्व वर्षों में पटाखा दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का आश्वासन दिया गया था, तो उसे लागू क्यों नहीं किया गया?
  6. यदि सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर लाइसेंस जारी हुए हैं, तो क्या संबंधित अधिकारियों की भूमिका और संभावित मिलीभगत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
  7. क्या प्रशासन दीपावली से पहले शहर के बाहर सुरक्षित स्थान निर्धारित कर पटाखा दुकानों को वहां स्थानांतरित करेगा?

जनता की सुरक्षा के लिए हादसे का इंतजार क्यों?

सोहन सिंह ने अपने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया है कि मंच का उद्देश्य किसी व्यापारी के वैध व्यवसाय में बाधा डालना नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। शहर से बाहर सुरक्षित स्थान निर्धारित होने पर पटाखा व्यापारियों को भी व्यवस्थित रूप से व्यवसाय करने का अवसर मिल सकता है।

अब सवाल प्रशासन से है—जब जनसुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उठ रही हैं और प्रधानमंत्री तक प्रार्थना पत्र भेजा गया है, तो क्या जिला प्रशासन तत्काल सुरक्षा जांच कर ठोस निर्णय लेगा या इस वर्ष भी मामला अगले साल तक टाल दिया जाएगा? किसी बड़े हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है कि जिम्मेदार अधिकारी अभी अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

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