
प्रधानमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय में दर्ज हुआ मामला; लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल, दीपावली से पहले कार्रवाई की मांग तेज
सुमेरपुर/नई दिल्ली, 27 अक्टूबर। पाली जिले के सुमेरपुर शहर में घनी आबादी वाले मुख्य बाजार में संचालित पटाखा दुकानों का मामला अब दिल्ली के केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंच गया है। सुमेरपुर नागरिक सुरक्षा एवं जनहित मंच की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए जनहित प्रार्थना पत्र के बाद शिकायत केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत दर्ज हो गई है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्रीय जनशिकायत पोर्टल CPGRAMS पर इस शिकायत के लिए गृह मंत्रालय के उप सचिव ए. के. मित्रा का नाम संबंधित अधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है। इससे सुमेरपुर की पटाखा दुकानों और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवाल अब केंद्रीय स्तर के प्रशासनिक रिकॉर्ड में आ गए हैं।
गृह मंत्रालय के उप सचिव के पास पहुंचा मामला
27 अक्टूबर 2026 को दर्ज शिकायत का पंजीकरण नंबर MINHA/E/2026/0051159 है। पोर्टल पर शिकायत की वर्तमान स्थिति Grievance Received दिखाई दे रही है। अधिकारी संबंधी विवरण में केंद्रीय गृह मंत्रालय के उप सचिव ए. के. मित्रा का नाम दर्ज है। हालांकि, पोर्टल पर अभी किसी स्वतंत्र जांच अधिकारी की नियुक्ति या जांच आदेश जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है।
सुमेरपुर में पटाखा दुकानों के लाइसेंस किसने और किस आधार पर दिए?
सुमेरपुर नागरिक सुरक्षा एवं जनहित मंच ने भैरू चौक से गांधी मूर्ति तक मुख्य बाजार में पटाखा दुकानों के संचालन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंच ने पूछा है कि घनी आबादी और व्यस्त बाजार में पटाखा दुकानों को अनुमति देने से पहले क्या संबंधित अधिकारियों ने वास्तविक स्थलीय निरीक्षण किया था? क्या अग्निशमन विभाग, पुलिस और अन्य विभागों की सुरक्षा रिपोर्ट ली गई थी? क्या आपातकालीन स्थिति में दमकल वाहनों की पहुंच सुनिश्चित की गई?
मंच की मांग है कि लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों, सुरक्षा सत्यापन करने वाले विभागों और संबंधित निरीक्षण रिपोर्टों की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।
बड़ा सवाल—किसकी जिम्मेदारी पर चल रही हैं दुकानें?
जनहित मंच के संस्थापक एवं सचिव सोहन सिंह ने कहा कि मुख्य बाजार में हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में पटाखों की बिक्री और भंडारण से जुड़े सुरक्षा इंतजामों की जांच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बाजार में कोई बड़ा अग्निकांड हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारी, सुरक्षा रिपोर्ट देने वाले विभाग या स्थानीय प्रशासन? सोहन सिंह ने मांग की कि किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय दीपावली से पहले ही प्रशासन ठोस निर्णय ले।
अवैध भंडारण की आशंका, आकस्मिक निरीक्षण की मांग
मंच ने बाजार के आसपास दुकानों, भवनों और गोदामों में पटाखों के संभावित अनधिकृत भंडारण की भी जांच करवाने की मांग की है। इसके साथ ही सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित लाइसेंसों की समीक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
राजस्थान सरकार में भी मामला प्रक्रियाधीन
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अलावा राजस्थान सरकार के लिए भी CPGRAMS पोर्टल पर अलग शिकायत दर्ज करवाई गई है। इसका पंजीकरण नंबर GOVRJ/E/2026/0015912 है। पोर्टल पर इसकी स्थिति Under Process है और संबंधित अधिकारी के रूप में उप सचिव जगदीश लाल मीणा का नाम दिखाई दे रहा है।
इस प्रकार सुमेरपुर की पटाखा दुकानों को लेकर उठाया गया जनसुरक्षा का मुद्दा केंद्र और राजस्थान सरकार, दोनों के प्रशासनिक स्तरों तक पहुंच चुका है।
अब निगाहें पाली जिला प्रशासन की कार्रवाई पर
जनहित मंच ने मांग की है कि दीपावली से पहले पटाखा दुकानों की सुरक्षा जांच करवाई जाए, लाइसेंस प्रक्रिया की समीक्षा हो और आवश्यकतानुसार दुकानों को शहर से बाहर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
अब सवाल यह है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और राजस्थान सरकार के समक्ष शिकायत दर्ज होने के बाद पाली जिला प्रशासन कब तक सुरक्षा जांच शुरू करेगा?
फिलहाल शिकायत केंद्रीय गृह मंत्रालय में प्राप्त हो चुकी है और राजस्थान सरकार वाली शिकायत प्रक्रियाधीन है। आगे की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर निगाहें बनी हुई हैं।
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