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मोबाइल रिचार्ज के बढ़े दामों पर फूटा उपभोक्ताओं का गुस्सा: 28 दिन का प्लान ₹349 और 30 दिन का ₹379 हुआ; TRAI के नए नियमों के बाद कंपनियों ने डाला आम जनता की जेब पर बोझ
मोबाइल रिचार्ज के बढ़े दामों पर फूटा उपभोक्ताओं का गुस्सा: 28 दिन का प्लान ₹349 और 30 दिन का ₹379 हुआ; TRAI के नए नियमों के बाद कंपनियों ने डाला आम जनता की जेब पर बोझ

नई दिल्ली। देश में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज प्लान्स की कीमतों में हाल ही में हुई भारी बढ़ोतरी के खिलाफ आम उपभोक्ताओं में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। बिना किसी पूर्व सूचना के टेलीकॉम कंपनियों द्वारा बढ़ाई गई दरों को लेकर इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी बहस छिड़ गई है। आम जनता लगातार निजी टेलीकॉम कंपनियों की मुनाफाखोरी और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) के रुख पर सवाल उठा रही है।

हालिया बदलावों के लागू होने के बाद अब उपभोक्ताओं को 28 दिनों की वैधता वाले बेसिक प्रीपेड प्लान के लिए ₹349 और 30 दिनों की वैधता वाले प्लान के लिए ₹379 चुकाने पड़ रहे हैं। सीधे तौर पर हर महीने होने वाले इस अतिरिक्त खर्च ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के मासिक बजट को बिगाड़ कर रख दिया है।

TRAI के 13वें संशोधन नियम और बढ़ती कीमतों का कनेक्शन

सड़कों से लेकर डिजिटल मंचों तक उठ रहे विरोध के बीच कीमतों में इस इजाफे का सीधा कनेक्शन TRAI के नए नियमों से जुड़ता दिख रहा है। दरअसल, नियामक संस्था TRAI ने ‘टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशन (13वां संशोधन), 2026’ अधिसूचित किया है।

इस संशोधन के तहत सभी टेलीकॉम कंपनियों के लिए दो बड़े बदलाव अनिवार्य किए गए थे:

  1. कंपनियों को बिना किसी डेटा बंडल के केवल ‘Voice-and-SMS-only’ (सिर्फ कॉलिंग और मैसेज) वाले किफायती रिचार्ज प्लान बाजार में पेश करने होंगे।

  2. 30 दिन या उससे कम वैधता वाले ऐसे प्लान लाने के निर्देश दिए गए हैं जो हर महीने एक ही निश्चित तारीख को रिन्यू (Monthly Renewal) हो सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल कॉलिंग का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए सस्ते प्लान लाने के इस विनियामक दबाव से कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर असर पड़ा। लिहाजा, कंपनियों ने अपने राजस्व (Revenue) को संतुलित करने और मुनाफा बनाए रखने के लिए मुख्यधारा के डेटा और कॉलिंग वाले नियमित प्लान्स (जैसे 28 और 30 दिन वाले पैक) के दाम भारी अंतर से बढ़ा दिए।

सोशल मीडिया पर ‘खुलेआम लूट’ बता रहे यूजर्स

रिचार्ज की नई दरों के सामने आते ही एक्स (ट्विटर), फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर यूजर्स ने कंपनियों और रेगुलेटर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है:

  • ‘खुलेआम लूट’ का आरोप: सोशल मीडिया यूजर रुचिरा वाघानी ने पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि 28 दिन के लिए ₹349 और 30 दिन के लिए ₹379 वसूलना आम जनता के साथ खुली लूट है, जिसे रोक पाने में नियामक संस्था TRAI पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

  • गणित समझाकर साधा निशाना: एक अन्य यूजर ने प्लान्स का दैनिक गणित समझाते हुए लिखा कि 30 दिन की वैधता वाला प्लान प्रतिदिन के हिसाब से 28 दिन वाले प्लान से भी 1.4% अधिक महंगा पड़ रहा है। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि कथित सुधारों के नाम पर आम जनता पर मनमानी कीमतें थोपना तुरंत बंद किया जाए।

  • नियामकों की भूमिका पर सवाल: एक यूजर ने तीखा तंज कसते हुए टिप्पणी की कि देश में कुछ नियामक विभाग सिर्फ कागजी व्यवस्था बनकर रह गए हैं, जिनका निजी कंपनियों की मनमानी पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इन बयानों से साफ है कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में लगातार महंगे होते डेटा और कॉलिंग प्लान्स ने आम उपभोक्ता को ठगा हुआ महसूस करने पर मजबूर कर दिया है।

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