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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चौतरफा मोर्चा: अंदरूनी कलह, सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और इस्तीफे की मांग के बीच ECI में बड़ा संवैधानिक संकट
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चौतरफा मोर्चा: अंदरूनी कलह, सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और इस्तीफे की मांग के बीच ECI में बड़ा संवैधानिक संकट

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर से लेकर शीर्ष न्यायपालिका, पूर्व नौकरशाहों, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज तक, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली को लेकर अभूतपूर्व संवैधानिक और प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान, एकतरफा निर्णय लेने की शैली और संस्थागत नियमों की अनदेखी के आरोपों के चलते उनके इस्तीफे और न्यायिक जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

1. चुनाव आयोग के भीतर बगावत: साथी आयुक्तों ने 14 बार दर्ज कराई लिखित आपत्ति

आयोग के इतिहास में संभवतः यह पहला मौका है जब मुख्य चुनाव आयुक्त पर खुद उनके ही साथी चुनाव आयुक्तों ने संस्थान के ‘बहुमत सिद्धांत’ को कुचलने का आरोप लगाया है:

  • दस्तावेजों में खुलासा: आंतरिक फाइलों के हवाले से सामने आया है कि पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 बार ज्ञानेश कुमार के एकतरफा निर्णयों पर आधिकारिक लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं।

  • महत्वपूर्ण निर्णयों से बेदखल: आरोप है कि दोनों चुनाव आयुक्तों को वोटर डेटाबेस मैनेजमेंट, सॉफ्टवेयर में किए गए तकनीकी बदलावों और फॉर्म-6 (नए मतदाताओं का पंजीकरण) की शर्तों में फेरबदल जैसे बुनियादी परिचालन फैसलों से पूरी तरह अलग रखा गया।

  • आईटी सिस्टम का केंद्रीकरण: बहु-सदस्यीय आयोग की संवैधानिक भावना के विपरीत आयोग के आईटी और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर का नियंत्रण पूरी तरह केंद्रीयकृत कर दिया गया।

2. पूर्व गृह सचिव आर.के. सिंह का खुला पत्र: ‘SIR प्रक्रिया पूरी तरह गैर-कानूनी’

पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी आर.के. सिंह ने एक कड़ा खुला पत्र जारी करते हुए निर्वाचन आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया:

  • जटिल और असंवैधानिक शर्तें: उन्होंने युवा मतदाताओं के नए पंजीकरण के लिए उनके माता-पिता के 2003 के वोटर रोल का विवरण मांगने जैसी गैर-कानूनी और मनमानी शर्तों का कड़ा विरोध किया।

  • सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन: आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के दौरान शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं।

  • विपक्ष से अपील: आर.के. सिंह ने देश के विपक्षी दलों से दो-टूक कहा कि जब तक वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की कल्पना बेमानी है।

3. न्यायपालिका के तीखे तेवर: जस्टिस भुइयां बोले—’अनुच्छेद 326 से कोई अथॉरिटी छेड़छाड़ नहीं कर सकती’

न्यायिक जगत से भी इस पूरे प्रकरण पर कड़ी और तल्ख प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:

  • सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां: हैदराबाद में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर व्याख्यान देते हुए जस्टिस भुइयां ने स्पष्ट किया कि बड़े पैमाने पर नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा, “अनुच्छेद 326 से कोई भी अथॉरिटी छेड़छाड़ नहीं कर सकती; कोई अदालत इसे स्वीकार नहीं कर सकती और संविधान से ऊपर कोई नहीं है।”

  • पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन: उन्होंने आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पूरी तरह सरकार के हाथ में होगी, तो निष्पक्षता की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

  • शीर्ष अदालत में याचिका: याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने, उनके 14 एकतरफा फैसलों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने और बहुमत के बिना लिए गए निर्णयों को असंवैधानिक घोषित करने की गुहार लगाई है। विकास सिंह ने तर्क दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त खुद को संस्था से ऊपर या सर्वोच्च नहीं मान सकते।

4. विपक्ष लामबंद: महाभियोग लाने पर विचार, नैतिक अधिकार खोने का आरोप

राजनीतिक मोर्चे पर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के संयुक्त मंच ने ज्ञानेश कुमार पर सत्ताधारी दल के दबाव में काम करने का खुला आरोप लगाया है:

  • कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद ज्ञानेश कुमार अब पद पर बने रहने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार खो चुके हैं।

  • विपक्षी दलों का आरोप है कि बिना पारदर्शिता के सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम बदलना और देश भर में बड़े पैमाने पर चुनिंदा मतदाताओं के नाम काटना सीधे तौर पर प्रशासनिक दुर्भावना का हिस्सा है। संयुक्त विपक्ष उनके खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने पर भी विचार कर रहा है।

5. सड़कों पर उतरा नागरिक समाज: छात्र संघों और संगठनों का उग्र प्रदर्शन

प्रशासनिक और कानूनी लड़ाई के साथ-साथ यह मामला अब सड़कों पर भी उतर आया है:

  • दिल्ली, मुंबई और देश के कई प्रमुख शहरों में नागरिक अधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।

  • मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार विरोध जताया। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, “यदि गांधी इस देश की आत्मा हैं, तो डॉ. आंबेडकर इसकी रीढ़ हैं। बाबासाहेब और नेहरू ने हमें वोट का अधिकार दिया था, जिसे छीनने की कोशिश हो रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।”

संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि निर्वाचन आयोग जैसी सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था के भीतर ऐसा आंतरिक असंतोष और न्यायपालिका की कड़ी निगरानी स्वतंत्र भारत के चुनावी इतिहास में अभूतपूर्व है।

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