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राष्ट्रीय हिंदू परिषद' सहित हिंदू संगठनों के नाम और कानूनी पंजीकरण का सच — जानिए कौन सा संगठन है पंजीकृत और क्या कहता है संगठनात्मक संविधान
राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ सहित हिंदू संगठनों के नाम और कानूनी पंजीकरण का सच — जानिए कौन सा संगठन है पंजीकृत और क्या कहता है संगठनात्मक संविधान

देश में सनातन संस्कृति और सामाजिक चेतना के नाम पर काम कर रहे हिंदू संगठनों के मिलते-जुलते नामों को लेकर अक्सर कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के बीच असमंजस की स्थिति बन जाती है। ‘राष्ट्रीय हिंदू परिषद’, ‘राष्ट्रीय हिंदू परिषद (भारत)’ और ‘श्री राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ जैसे नामों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब कानूनी और संगठनात्मक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है।

इस पूरे विषय पर श्री राष्ट्रीय हिन्दू परिषद की कानूनी सलाहकार समिति के सचिव सोहन सिंह कुम्पावत ने भारतीय कानून, पंजीकरण नियमावली और संगठन के आधिकारिक संविधान के संदर्भ में विस्तृत जानकारी साझा की है।

‘राष्ट्रीय’ शब्द और तीन शब्दों के नाम पर कानूनी अड़चन

सोहन सिंह कुम्पावत ने बताया कि भारतीय संविधान और The Emblems and Names (Prevention of Improper Use) Act, 1950 (प्रतीक और नाम अनुचित प्रयोग रोकथाम अधिनियम) के तहत किसी भी निजी संस्था या ट्रस्ट के नामकरण के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं:

  1. ‘राष्ट्रीय’ शब्द का स्वतंत्र प्रयोग वर्जित: कानून के तहत कोई भी निजी ट्रस्ट या समिति सीधे ‘राष्ट्रीय’ (National) शब्द को मुख्य नाम के रूप में प्रयोग कर सीधे पंजीकृत नहीं करा सकती, क्योंकि इससे यह आभास होता है कि संस्था को केंद्र सरकार का सीधा संरक्षण प्राप्त है।

  2. तीन सामान्य शब्दों का नियम: केवल तीन सामान्य शब्दों (Generic Words)—जैसे “राष्ट्रीय हिंदू परिषद”—का सीधा स्वतंत्र पंजीकरण रजिस्ट्रार कार्यालय के नियमों के अनुसार संभव नहीं होता। इसके लिए नाम में एक विशिष्ट पहचान या उपसर्ग (Prefix) होना अनिवार्य है।

‘श्री राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ क्यों और कैसे है पंजीकृत?

कानूनी समिति के सचिव ने स्पष्ट किया कि संगठन की स्थापना के समय सभी तकनीकी पहलुओं का पालन किया गया:

  • संस्थापकों ने नाम के आगे “श्री” उपसर्ग जोड़कर इसे एक विशिष्ट और कानूनी रूप से मान्य धार्मिक-सांस्कृतिक संस्था के रूप में पंजीकृत कराया।

  • संस्था को सोसायटी/ट्रस्ट पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण संख्या: 856/2018 तथा आयकर विभाग द्वारा अधिकृत पैन नंबर: AAVTS3584L प्राप्त है।

  • संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष केशर सिंह (उर्फ दलवीर हिन्दू) के नेतृत्व में यह संगठन एक वैध और पंजीकृत निकाय के रूप में संचालित है।

संगठन के संविधान का बड़ा खुलासा: ‘राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ और ‘राष्ट्रीय हिंदू परिषद (भारत)’ हैं इसके अधिकृत प्रकोष्ठ

नामों को लेकर चल रहे भ्रम को समाप्त करते हुए सोहन सिंह कुम्पावत ने संगठन के संविधान का हवाला देते हुए एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की:

  • संविधान में आधिकारिक उल्लेख: ‘श्री राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ के पंजीकृत संविधान और नियमावली में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि ‘राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ और ‘राष्ट्रीय हिंदू परिषद (भारत)’ इसी मूल संगठन के आंतरिक प्रकोष्ठ (Wings / Frontal Units) हैं।

  • कानूनी मान्यता का दायरा: चूँकि स्वतंत्र रूप से इन नामों का सीधा पंजीकरण संभव नहीं था, इसलिए मूल पंजीकृत संस्था ‘श्री राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ ने अपने वैधानिक ढांचे के तहत इन दोनों नामों को अपने प्रकोष्ठ के रूप में अंगीकार किया है।

  • सीधा जुड़ाव: इसका अर्थ यह है कि ‘राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ और ‘राष्ट्रीय हिंदू परिषद (भारत)’ कोई अलग या अवैध संगठन नहीं हैं, बल्कि ये दोनों ही नाम और इकाइयां मूल पंजीकृत संस्था ‘श्री राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ के वैधानिक पंजीकरण और छत्रछाया से सीधे जुड़े हुए हैं।

संगठनात्मक स्थिति: एक नज़र में

नाम संगठनात्मक व कानूनी स्थिति
श्री राष्ट्रीय हिंदू परिषद मूल पंजीकृत संस्था (पंजीकरण सं. 856/2018, PAN: AAVTS3584L)
राष्ट्रीय हिंदू परिषद श्री राष्ट्रीय हिंदू परिषद के संविधान के अंतर्गत अधिकृत प्रकोष्ठ (Affiliated Wing)
राष्ट्रीय हिंदू परिषद (भारत) श्री राष्ट्रीय हिंदू परिषद के संविधान के अंतर्गत अधिकृत प्रकोष्ठ (Affiliated Wing)

सोहन सिंह कुम्पावत ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं। यह पूरी तरह से एक ही वैधानिक परिवार है, जिसकी मूल कानूनी धुरी ‘श्री राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ है और बाकी दोनों इकाइयां इसके आधिकारिक संविधान के तहत मान्यता प्राप्त हैं।

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