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परकोटे के नीचे जयपुर मेट्रो विस्तार को मिली रफ्तार: गलता गेट पर CS वी. श्रीनिवास ने TBM का किया शुभारंभ; 1511 करोड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक बनेगी सुरंग, 2028 तक दौड़ेगी मेट्रो
परकोटे के नीचे जयपुर मेट्रो विस्तार को मिली रफ्तार: गलता गेट पर CS वी. श्रीनिवास ने TBM का किया शुभारंभ; 1511 करोड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक बनेगी सुरंग, 2028 तक दौड़ेगी मेट्रो

जयपुर (विशेष संवाददाता)। राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे के भीतर जयपुर मेट्रो विस्तार परियोजना को लेकर शनिवार को बड़ा कदम उठाया गया। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गलता गेट पर टनल बोरिंग मशीन (TBM) का शुभारंभ कर मेट्रो फेज-1C के भूमिगत सुरंग निर्माण कार्य की विधिवत शुरुआत की। इस परियोजना के तहत बड़ी चौपड़ से गलता गेट होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तक मेट्रो कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है।

करीब 1,511 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में कुल 3.80 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनेगा, जिसमें लगभग 3 किलोमीटर भूमिगत ट्रैक और 0.8 किलोमीटर एलिवेटेड रैंप शामिल रहेगा। मेट्रो प्रबंधन का लक्ष्य है कि TBM जून-जुलाई 2027 तक बड़ी चौपड़ पहुंच जाए, जिसके बाद सुरंग को मौजूदा नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। पूरी परियोजना को मार्च 2028 तक मुकम्मल करने की डेडलाइन तय की गई है।

ऐतिहासिक परकोटे की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती, सतह पर नहीं होगी खुदाई

परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती ऐतिहासिक परकोटे के नीचे सुरंग बनाना है। इस क्षेत्र में घनी आबादी, पुराने भवन, ऐतिहासिक धरोहरें, संकरी सड़कें और व्यस्त बाजार मौजूद हैं। ऐसे में पारंपरिक ओपन-कट खुदाई से यातायात, व्यापार और आसपास के प्राचीन भवनों को भारी नुकसान का अंदेशा था।

इसे ध्यान में रखते हुए शील्ड टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह मशीन जमीन के 15 मीटर नीचे खुदाई करने के साथ-साथ हाथों-हाथ कंक्रीट के मजबूत रिंग सेगमेंट भी स्थापित करती जाएगी। इससे सड़क की सतह पर यातायात और बाजारों का कारोबार बिना किसी बाधा के सामान्य रूप से जारी रहेगा। निर्माण के दौरान आसपास की इमारतों की सुरक्षा पर 24 घंटे सेंसर के जरिए तकनीकी निगरानी रखी जाएगी।

2.25 किमी लंबी बनेंगी दो समानांतर सुरंगें, गलता गेट होगा नया स्टेशन

जयपुर मेट्रो फेज-1C के तहत बड़ी चौपड़ से गलता गेट के बीच लगभग 2.25 किलोमीटर लंबी दो समानांतर भूमिगत सुरंगें खोदी जाएंगी। किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए दोनों सुरंगों के बीच सात क्रॉस पैसेज बनाए जाएंगे।

इस कॉरिडोर पर दो नए स्टेशन प्रस्तावित हैं—

  • गलता गेट स्टेशन: यह भूमिगत रहेगा, जो करीब 200 मीटर लंबा और 24 मीटर चौड़ा होगा। इसका ट्रैक जमीन से करीब 15 मीटर नीचे रहेगा।

  • ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन: यह एलिवेटेड स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा।

पहले इस योजना में रामगंज चौपड़ को स्टेशन बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में सरकार ने कॉरिडोर की उपयोगिता और संभावित यात्री भार बढ़ाने के लिए नया सर्वे कराया। तकनीकी परीक्षण और आर्थिक विश्लेषण के बाद रामगंज चौपड़ की जगह गलता गेट को भूमिगत स्टेशन बनाया गया, ताकि अधिक आबादी को जोड़ा जा सके।

ट्रांसपोर्ट नगर से अजमेर रोड तक जुड़ेगा ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि यह परियोजना जयपुर के सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देगी। फेज-1C और फेज-1D (मानसरोवर से अजमेर रोड) के पूरा होते ही शहर का पूर्वी और पश्चिमी छोर आपस में जुड़ जाएगा। इससे ट्रांसपोर्ट नगर (दिल्ली-आगरा हाईवे मुहाना) से लेकर अजमेर रोड तक सीधी और निर्बाध मेट्रो कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकेगी।

गहलोत सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत हुआ था प्रोजेक्ट

गौरतलब है कि जयपुर मेट्रो फेज-1C (बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर) की नींव पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के समय रखी गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बजट 2022-23 में परकोटे के विस्तार के लिए इस फेज की आधिकारिक घोषणा की थी। इसके बाद गहलोत कैबिनेट द्वारा वित्तीय स्वीकृति जारी कर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इसके टेंडर और कार्यादेश की प्रक्रिया पूरी की गई थी। अब मौजूदा सरकार में रूट और स्टेशनों के पुनर्सर्वेक्षण के बाद इसके भूमिगत निर्माण कार्य को जमीन पर उतारा गया है।

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