
अमेरिकी न्याय विभाग की एपस्टीन फाइलों में मौजूद तस्वीरों से राजनीतिक विवाद बढ़ा; राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल, जबकि पुरी पहले मुलाकातों को पेशेवर बता चुके हैं।
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर। अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की तस्वीरें सामने आने के बाद भारतीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर मौजूद एपस्टीन से संबंधित दस्तावेजों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इनमें पुरी और एपस्टीन एक कमरे में बैठे दिखाई देते हैं।
तस्वीरों को लेकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्रीय मंत्री के पुराने बयानों पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पुरी पहले एपस्टीन से मुलाकातों को एक प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई पेशेवर बैठकें बताते रहे हैं, जबकि वायरल तस्वीरों में दोनों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति दिखाई नहीं देता।
हालांकि, केवल तस्वीरों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बैठक के दौरान कमरे में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था। तस्वीरों से मुलाकात की तारीख, अवधि और बातचीत के विषय की भी पूरी जानकारी नहीं मिलती।
अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों में 11 तस्वीरें होने का दावा
एपस्टीन मामले से जुड़े अमेरिकी न्याय विभाग के सार्वजनिक रिकॉर्ड के नौवें डेटा सेट में हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन की तस्वीरें सामने आई हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित दस्तावेज में कम से कम 11 तस्वीरें मौजूद हैं। इनमें दोनों व्यक्तियों के बैठने और बातचीत करने के दृश्य लगभग एक जैसे दिखाई देते हैं।
20 अक्टूबर, मंगलवार को इन तस्वीरों के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर संबंधित फाइल का नंबर EFTA01191294 है। इस दस्तावेज को आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है।
अमेरिकी न्याय विभाग की मूल फाइल: https://www.justice.gov/epstein/files/DataSet%209/EFTA01191294.pdf
इस लिंक पर आयु सत्यापन की आवश्यकता हो सकती है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने उठाए सवाल
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तस्वीरें साझा करते हुए हरदीप सिंह पुरी से स्पष्टीकरण मांगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि केंद्रीय मंत्री एपस्टीन से कभी अकेले नहीं मिले, तो सामने आई तस्वीरों को किस संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
श्रीनेत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व की भी आलोचना की। उन्होंने पुरी की मुलाकातों की परिस्थितियों को सार्वजनिक करने की आवश्यकता जताई।
कांग्रेस का मुख्य सवाल यह है कि प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बताई जा रही बैठकों की तस्वीरों में अन्य सदस्य क्यों नजर नहीं आ रहे हैं।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी पूछा- दूसरे सदस्य कहां थे?
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी वायरल तस्वीरों को लेकर केंद्रीय मंत्री पर सवाल उठाए।
मोइत्रा ने पुरी के उस पुराने बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने एपस्टीन से तीन या चार बार प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात होने की बात कही थी।
महुआ मोइत्रा ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए पूछा कि तस्वीरों में प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य कहां हैं।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री के पुराने वीडियो बयान को भी साझा किया। इस बयान में पुरी अपनी मुलाकातों को पेशेवर संपर्क का हिस्सा बताते नजर आते हैं।
विपक्ष की ओर से यह मांग भी उठ रही है कि मुलाकातों की प्रकृति और उनके उद्देश्य को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए।
राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइलों को लेकर भाजपा और RSS पर निशाना साधा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी एपस्टीन से जुड़ी तस्वीरों को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर राजनीतिक टिप्पणी की।
उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुंबई पहुंचने और अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़ी तस्वीरों का उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में ब्लैकमेलिंग और देशहित से संबंधित सवाल उठाते हुए भाजपा तथा RSS को निशाने पर लिया।
हालांकि, राहुल गांधी की टिप्पणी राजनीतिक आरोप के रूप में सामने आई है। उपलब्ध तस्वीरों से किसी प्रकार की ब्लैकमेलिंग या आपराधिक गतिविधि में पुरी की भागीदारी प्रमाणित नहीं होती।
फरवरी में हरदीप सिंह पुरी ने खारिज किए थे आरोप
एपस्टीन फाइलों में अपना नाम आने के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने फरवरी 2026 में आरोपों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी थी।
उन्होंने स्पष्ट किया था कि एपस्टीन के साथ उनकी मुलाकातें पेशेवर प्रकृति की थीं और उनका उसके आपराधिक मामलों से कोई संबंध नहीं था।
पुरी के अनुसार, ये मुलाकातें उस अवधि में हुई थीं जब वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत का कार्यकाल पूरा कर चुके थे और 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुए थे।
उन्होंने बताया था कि वह इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) से जुड़े काम के दौरान एपस्टीन के संपर्क में आए थे।
पुरी का कहना था कि सार्वजनिक और अंतरराष्ट्रीय संस्थागत जीवन में अलग-अलग लोगों से मुलाकात होती रहती है। किसी व्यक्ति से पेशेवर मुलाकात होने का अर्थ उसके व्यक्तिगत या आपराधिक कार्यों से जुड़ाव नहीं होता।
IPI के प्रतिनिधिमंडल के जरिए हुई थी मुलाकात: पुरी
फरवरी में दिए गए एक इंटरव्यू में हरदीप सिंह पुरी ने बताया था कि इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट से जुड़े प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में उनकी एपस्टीन से मुलाकात हुई थी।
उनके अनुसार, उस समय संस्थान में वरिष्ठ पद पर कार्यरत टेर्जे रोड-लार्सन एपस्टीन को जानते थे।
पुरी ने बताया था कि पहली बार संपर्क होने पर उन्हें एपस्टीन की पृष्ठभूमि के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी।
उन्होंने यह भी कहा था कि बाद में एपस्टीन के बारे में इंटरनेट पर जानकारी जुटाई गई और आपस में इस बात पर चर्चा हुई कि उससे मुलाकात करना उचित होगा या नहीं।
पुरी ने अपनी सफाई में मुलाकातों को संस्थागत और पेशेवर संपर्क तक सीमित बताया था।
नवंबर 2025 में सार्वजनिक चर्चा में आया था पुरी का नाम
हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन के बीच संपर्क की जानकारी नवंबर 2025 में सामने आए अमेरिकी संसदीय निगरानी समिति के रिकॉर्ड के बाद सार्वजनिक चर्चा में आई थी।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की निगरानी समिति की ओर से जारी ईमेल रिकॉर्ड में दोनों के बीच संवाद का उल्लेख किया गया था।
इसके बाद 30 जनवरी 2026 को अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन से संबंधित बड़ी संख्या में दस्तावेज सार्वजनिक किए।
इन रिकॉर्ड में जून 2014 से जून 2017 के बीच के ईमेल भी शामिल बताए गए हैं। इनके आधार पर पुरी और एपस्टीन के बीच संपर्क तथा मुलाकातों की जानकारी सामने आई।
2015 से 2017 के बीच तीन मुलाकातों का उल्लेख
सामने आए ईमेल रिकॉर्ड से जुड़ी रिपोर्टों में हरदीप सिंह पुरी की न्यूयॉर्क में एपस्टीन के आवास पर तीन मुलाकातों का उल्लेख किया गया है।
इनकी तारीखें 4 फरवरी 2015, 6 जनवरी 2016 और 19 मई 2017 बताई गई हैं।
इन तारीखों को लेकर विवाद इसलिए भी है क्योंकि जेफ्री एपस्टीन को वर्ष 2008 में यौन अपराध से संबंधित मामले में दोषी ठहराया जा चुका था।
इस आधार पर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक होने के बावजूद एपस्टीन से मुलाकातें क्यों जारी रहीं।
वहीं, पुरी इन संपर्कों को पेशेवर बताते हुए किसी भी आपराधिक गतिविधि से संबंध होने से इनकार कर चुके हैं।
एपस्टीन के निजी द्वीप का ईमेल में जिक्र
एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में एक ईमेल का भी उल्लेख सामने आया है, जिसमें हरदीप सिंह पुरी की ओर से एपस्टीन के निजी द्वीप का संदर्भ दिया गया था।
रिपोर्टों के अनुसार, संदेश में एपस्टीन को त्योहारों की शुभकामनाएं देते हुए उसके द्वीप से लौटने के बाद संपर्क करने की बात कही गई थी।
ईमेल में भारत से संबंधित कुछ पुस्तकें देने और भारत के प्रति रुचि बढ़ाने के विषय पर बातचीत करने का भी उल्लेख था।
इसके अलावा एक संवाद में ‘Have fun’ शब्दों का इस्तेमाल चर्चा में आया।
पुरी ने इस अभिव्यक्ति को लेकर कहा था कि यह उनके सामान्य बोलचाल का हिस्सा है और इसका कोई विशेष आपत्तिजनक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।
ईमेल में किसी द्वीप का उल्लेख होना और वहां वास्तव में जाने का प्रमाण होना दो अलग बातें हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर पुरी के उस द्वीप पर जाने की पुष्टि नहीं होती।
जेफ्री एपस्टीन कौन था?
जेफ्री एपस्टीन अमेरिका का एक धनी फाइनेंसर था, जिसके संपर्क कई प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों, उद्योगपतियों और मनोरंजन जगत की हस्तियों से थे।
उसका नाम नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और यौन तस्करी से जुड़े गंभीर मामलों में सामने आया था।
2005 में उसके खिलाफ नाबालिग से संबंधित यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच शुरू हुई।
वर्ष 2008 में फ्लोरिडा में एपस्टीन ने नाबालिग से वेश्यावृत्ति के लिए संपर्क करने सहित संबंधित अपराधों में दोष स्वीकार किया। इसके बाद उसे जेल की सजा हुई।
2019 में अमेरिकी संघीय अधिकारियों ने एपस्टीन को नाबालिग लड़कियों की यौन तस्करी से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया।
मुकदमे की सुनवाई पूरी होने से पहले अगस्त 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई। आधिकारिक जांच में उसकी मौत को आत्महत्या बताया गया।
घिसलीन मैक्सवेल को सुनाई गई 20 साल की सजा
एपस्टीन की करीबी सहयोगी घिसलीन मैक्सवेल पर भी नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण में सहायता करने के गंभीर आरोप लगे थे।
दिसंबर 2021 में अमेरिकी अदालत की जूरी ने उसे संबंधित अपराधों में दोषी पाया।
इसके बाद जून 2022 में मैक्सवेल को 20 वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई।
एपस्टीन मामले से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद कई देशों में उसके संपर्कों और प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ संबंधों को लेकर चर्चा होती रही है।
तस्वीरें सामने आने से क्या साबित होता है?
हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन की तस्वीरों को लेकर उठे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल मुलाकातों की परिस्थितियों का है।
तस्वीरें दोनों के बीच संपर्क होने की जानकारी को मजबूत करती हैं, लेकिन केवल तस्वीरों से यह तय नहीं किया जा सकता कि बैठक किस उद्देश्य से हुई, कौन-कौन उपस्थित था या बातचीत में किन विषयों पर चर्चा हुई।
इसी तरह किसी व्यक्ति का नाम एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज होना उसके अपराधों में भागीदारी का प्रमाण नहीं है।
पुरी पहले ही एपस्टीन से मुलाकातों की बात स्वीकार कर चुके हैं। उनका पक्ष है कि ये संपर्क पेशेवर थे और एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों से उनका कोई संबंध नहीं था।
दूसरी ओर, विपक्ष अब यह स्पष्ट करने की मांग कर रहा है कि प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बताई गई बैठकों में कौन शामिल था और तस्वीरों का वास्तविक संदर्भ क्या है।
तस्वीरों के बाद आगे क्या?
अमेरिकी न्याय विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने से हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन के पुराने संपर्क एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं।
कांग्रेस, TMC और अन्य विपक्षी नेताओं ने मुलाकातों को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री का पहले दिया गया स्पष्टीकरण इन संपर्कों को पेशेवर बताता है।
अब इस विवाद में तस्वीरों की तारीख, बैठक में मौजूद लोगों और बातचीत के उद्देश्य से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
जवाई टुडे | राष्ट्रीय समाचार
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