
जोधपुर। राजस्थान के पशुपालन विभाग में आवश्यक अस्थायी आधार (UTB) के तहत वर्ष 2025 में नियुक्त किए गए पशुधन निरीक्षकों की वित्तीय स्वीकृति 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो गई है। सरकार से सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) की वित्तीय स्वीकृति जारी न होने के कारण बाड़मेर सहित पूरे जोधपुर संभाग के सैकड़ों पशु चिकित्सा केंद्रों पर अचानक ताले लटक गए हैं, जिससे ग्रामीण अंचलों में पशुपालकों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है।
इस गंभीर स्थिति को लेकर जोधपुर संभाग के समस्त UTB पशुधन निरीक्षकों ने पशुपालन कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत को ज्ञापन भेजकर आगामी स्थायी भर्ती होने तक सेवा बहाली और वित्तीय स्वीकृति जारी कराने की पुरजोर गुहार लगाई है।
जोधपुर संभाग में 344 और बाड़मेर में करीब 70 पदों पर असर
पशुपालन मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, जोधपुर संभाग में पशुधन निरीक्षकों के अधिकांश पद रिक्त होने के चलते पशुपालकों को सुलभ चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए UTB के तहत 344 पशुधन निरीक्षकों की भर्ती की गई थी।
इसकी वित्तीय स्वीकृति 30 सितंबर 2026 तक ही मान्य थी। अवधि समाप्त होते ही विभाग ने इन 344 निरीक्षकों से सेवाएं लेना बंद कर दिया है। अकेले बाड़मेर जिले में करीब 70 और संभाग स्तर पर 344 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन इन कर्मियों के जिम्मे था।
बाड़मेर में 179 केंद्र पहले से रिक्त, अब दूर-दराज भटकने को मजबूर पशुपालक
ग्रामीण पशुपालकों का कहना है कि बाड़मेर जिले में पहले से ही करीब 179 पशु चिकित्सा संस्थानों और उपकेंद्रों पर पद रिक्त चल रहे थे। बीते 16 महीनों से UTB निरीक्षकों के भरोसे ही सीमावर्ती और सुदूर ढाणियों के उपकेंद्र चल रहे थे।
अब इनके हटते ही केंद्रों पर ताले लग गए हैं, जिसके चलते:
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मौसमी बीमारियों के इस दौर में बीमार मूक पशुओं का प्राथमिक उपचार और दवा वितरण ठप हो गया है।
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पशुओं के नियमित टीकाकरण और पशु स्वास्थ्य शिविरों पर सीधा असर पड़ा है।
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पशुपालकों को छोटे-मोटे इलाज के लिए भी 20 से 40 किलोमीटर दूर बड़े कस्बों के अस्पतालों में जाना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
मंत्री से मांग: स्थायी भर्ती होने तक जारी हो वित्तीय स्वीकृति
UTB पशुधन निरीक्षकों ने अपने मांग पत्र में बताया कि उन्होंने पिछले 16 महीनों में विकट भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाएं और विभागीय योजनाओं को सुचारू रखा है। अचानक कार्यकाल समाप्त होने से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है, वहीं पशुपालक भी बेहाल हैं।
पशुपालकों, ग्रामीणों और प्रभावित निरीक्षकों ने राज्य सरकार और पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत से मांग की है कि पशुधन के व्यापक हित और भारी रिक्तियों को देखते हुए नई नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक UTB कार्मिकों की वित्तीय स्वीकृति को तुरंत आगे बढ़ाया जाए, ताकि बंद पड़े अस्पतालों के ताले खुल सकें।
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