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पाली, 23 अक्टूबर। राजस्थान के पाली जिले से एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां समय से पहले जन्मी एक नवजात बच्ची को परिजन अस्पताल में भर्ती करवाने के बाद घर चले गए। बच्ची की हालत गंभीर थी। अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन 22 अक्टूबर की रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

मौत की सूचना परिजनों को फोन पर दी गई, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे बच्ची का शव लेने अस्पताल नहीं पहुंचे। फिलहाल शव बांगड़ अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है।

सातवें महीने में हुआ जन्म, सांस लेने में हो रही थी परेशानी

जानकारी के अनुसार, पाली जिले के रानी क्षेत्र में 20 अक्टूबर को एक महिला की घर पर समय से पहले डिलीवरी हुई थी।गर्भावस्था के सातवें महीने में जन्म लेने के कारण नवजात बेहद कमजोर थी। उसका वजन एक किलोग्राम से भी कम था परिजन पहले उसे स्थानीय अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने बच्ची को पाली के बांगड़ अस्पताल रेफर कर दिया। यहां दोपहर करीब 12:30 बजे उसे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती किया गया।

बच्ची भूख से रोई तो स्टाफ ने मां को तलाशा

अस्पताल में भर्ती करवाने के कुछ समय बाद परिजन कथित तौर पर स्टाफ को जानकारी दिए बिना चले गए। जब बच्ची को दूध पिलाने की जरूरत पड़ी तो नर्सिंग स्टाफ ने उसकी मां की तलाश की, लेकिन वह अस्पताल में नहीं मिली। इसके बाद परिजनों से फोन पर संपर्क किया गया। अस्पताल स्टाफ के अनुसार, परिजनों ने बताया कि वे घर लौट चुके हैं। ऐसी स्थिति में NICU में तैनात नर्सिंग ऑफिसर सोनू कुमारी सैन ने नवजात की देखभाल की व्यवस्था की।

दूसरी महिला का दूध पिलाकर की देखभाल

नर्सिंग ऑफिसर सोनू कुमारी सैन ने बताया कि नवजात को दूसरी महिला का दूध पिलाकर उसकी देखभाल की गई। अस्पताल के डॉक्टरों और वार्ड स्टाफ ने भी बच्ची की स्थिति को देखते हुए उपचार जारी रखा। सोनू कुमारी सैन के अनुसार, अपने कार्यकाल में उन्होंने पहली बार ऐसा मामला देखा, जिसमें परिजन नवजात को अस्पताल में छोड़कर चले गए और उसकी मौत के बाद भी शव लेने नहीं पहुंचे। बच्ची की स्थिति का जिक्र करते हुए वे भावुक हो गईं।

22 अक्टूबर की रात 10:30 बजे तोड़ा दम

बांगड़ अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट डॉक्टर माणिक हरकटे के अनुसार, नवजात को अस्पताल लाए जाने के समय सांस लेने में परेशानी हो रही थी। बच्ची का वजन एक किलोग्राम से भी कम था और उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे। समय से पहले जन्म और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के कारण उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के प्रयासों के बावजूद 22 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे उपचार के दौरान बच्ची की मौत हो गई।

मौत की सूचना के बाद भी नहीं पहुंचे परिजन

नवजात की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को फोन पर सूचना दी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिजन शव लेने अस्पताल नहीं पहुंचे। इसके बाद बच्ची के शव को अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया। परिजनों के अस्पताल से चले जाने और शव लेने नहीं पहुंचने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं, इस संबंध में उनका पक्ष सामने नहीं आया है।

पुलिस परिजनों से करेगी संपर्क

पाली कोतवाली थाने के SHO रविन्द्र सिंह खिंची ने बताया कि नवजात के परिजनों का पता लगाकर उन्हें बुलाया जाएगा, ताकि वे बच्ची का शव ले जा सकें। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में परिजनों के खिलाफ किसी FIR या आपराधिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। मामले में आगे की स्थिति पुलिस और अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगी।

अस्पताल स्टाफ की संवेदनशीलता आई सामने

इस पूरे मामले में बांगड़ अस्पताल के NICU स्टाफ की भूमिका भी सामने आई है। गंभीर हालत में भर्ती नवजात की देखभाल के लिए नर्सिंग स्टाफ ने दूध की व्यवस्था की और डॉक्टरों ने उपचार जारी रखा। हालांकि बच्ची को बचाया नहीं जा सका, लेकिन इस घटना ने समय से पहले जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं की देखभाल और परिवार की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।

जवाई टुडे | पाली समाचार डेस्क

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