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आसाराम को 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने का राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त आदेश: कोर्ट ने कहा- 'दूसरे राज्य में दोषी होने से यहां की पैरोल नहीं रोकी जा सकती', सरकार से मांगी कंप्लायंस रिपोर्ट
आसाराम को 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने का राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त आदेश: कोर्ट ने कहा- ‘दूसरे राज्य में दोषी होने से यहां की पैरोल नहीं रोकी जा सकती’, सरकार से मांगी कंप्लायंस रिपोर्ट

जोधपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने का स्पष्ट आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें गुजरात में सजायाफ्ता होने का हवाला देकर रिहाई रोकी गई थी। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी दूसरे राज्य में दोषी ठहराए जाने के आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में मंजूर की गई पैरोल को रोका नहीं जा सकता।

राजस्थान हाईकोर्ट की न्यायाधीश डॉ. नूपुर भाटी और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने 3 अगस्त को दिए गए अपने 20 दिवसीय पैरोल के आदेश की तत्काल पालना सुनिश्चित करने और आसाराम की रिहाई के संबंध में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार की दलील खारिज: कोर्ट बोला—’आदेश को बेअसर करने का कोई कानूनी आधार नहीं’

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) बीएल भाटी ने राज्य सरकार की ओर से दलील दी कि आसाराम को गुजरात की अदालत द्वारा भी एक अन्य मामले में दोषी ठहराया गया है। राज्य सरकार ने जेल नियम 14(A) का हवाला देते हुए तर्क रखा कि बंदी को गुजरात हाईकोर्ट में पैरोल के लिए आवेदन करना चाहिए था, जहां उसकी इमरजेंसी पैरोल अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है। इसलिए तकनीकी रूप से उसे यहां से पैरोल नहीं दी जा सकती।

वहीं आसाराम के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट ने विधिक प्रक्रिया और परिस्थितियों को देखते हुए पहले ही 20 दिन की पैरोल मंजूर की थी, जिसे जेल प्रशासन द्वारा अमल में नहीं लाया जा रहा है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने पाया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को बेअसर या निष्प्रभावी करने का कोई ठोस विधिक आधार पेश नहीं कर सकी। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार द्वारा इस आदेश के खिलाफ न तो सुप्रीम कोर्ट में कोई विशेष अपील (SLP) दायर की गई और न ही हाईकोर्ट में आदेश वापस लेने (Recall) का कोई प्रार्थना पत्र लगाया गया। ऐसी स्थिति में न्यायिक आदेश का पालन करना अनिवार्य है।

आसाराम केस: दोनों राज्यों में सजा और कानूनी घटनाक्रम

आसाराम पर राजस्थान और गुजरात दोनों राज्यों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और दोनों ही मामलों में अदालतों ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है:

1. जोधपुर (राजस्थान) प्रकरण

  • अगस्त 2013: जोधपुर के मणाई आश्रम में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का मामला सामने आया और 21 अगस्त 2013 को महिला थाने में नामजद एफआईआर दर्ज हुई।

  • 31 अगस्त 2013: पुलिस ने आसाराम को इंदौर आश्रम से गिरफ्तार कर जेल भेजा।

  • 25 अप्रैल 2018: जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए ताउम्र कारावास की सजा सुनाई।

  • 27 मई 2026: राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा के स्थगन की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा।

2. गांधीनगर/अहमदाबाद (गुजरात) प्रकरण

  • अगस्त 2013: गुजरात के गांधीनगर स्थित आश्रम की एक शिष्या (महिला) ने आसाराम पर लंबे समय तक दुष्कर्म करने का मुकदमा दर्ज कराया था।

  • 31 जनवरी 2023: गुजरात की अदालत ने इस मामले में भी आसाराम को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा से दंडित किया था।

राजस्थान हाईकोर्ट के ताजा रुख के बाद अब राज्य सरकार और जेल प्रशासन को 20 दिनों की पैरोल अवधि के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर रिहाई की अनुपालन रिपोर्ट अदालत में दाखिल करनी होगी।

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