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भारत में तेजी से बढ़ रहे स्ट्रोक के केस, 30 मिनट की धूप से होगी रिकवरी; सामने आई AIIMS की स्टडी
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एम्स दिल्ली के डॉक्टरों की एक नई स्टडी में सामने आया है कि रोजाना सिर्फ 30 मिनट की धूप, अगर नियमित इलाज के साथ ली जाए, तो स्ट्रोक के मरीजों की रिकवरी बेहतर हो सकती है और उनकी जिंदगी में सुधार आ सकता है. यह स्टडी संस्थान के पांचवें रिसर्च डे के दौरान प्रस्तुत किया गया, जिसमें स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन के लिए एक आसान और कम खर्च वाला विकल्प सामने आया है.

कई लोगों के लिए उपलब्ध नहीं होती थेरेपी

दरअसल, स्ट्रोक से उबरने की प्रक्रिया अक्सर लंबी और चुनौतीपूर्ण होती है. मरीजों को लंबे समय तक थेरेपी की जरूरत पड़ती है, जो कई लोगों के लिए महंगी या आसानी से उपलब्ध नहीं होती. देश में स्ट्रोक का बोझ लगातार बढ़ रहा है. ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 में भारत में करीब 12.5 लाख नए स्ट्रोक के मामले सामने आए थे, जबकि लगभग 94 लाख लोग स्ट्रोक के लंबे समय के प्रभावों के साथ जीवन बिता रहे थे.

एम्स के डॉक्टरों ने यह जानने की कोशिश की कि क्या प्राकृतिक धूप, अगर स्टैंडर्ड पोस्ट-स्ट्रोक इलाज के साथ जोड़ी जाए, तो रिकवरी में सुरक्षित रूप से मदद कर सकती है. स्टडी में पाया गया कि जिन मरीजों को नियमित इलाज के साथ धूप दी गई, उनमें केवल सामान्य इलाज लेने वाले मरीजों की तुलना में स्ट्रोक से जुड़ी लाइफ कहीं बेहतर रही. इसके अलावा, नींद और मूड में भी सुधार देखा गया और किसी गंभीर साइड इफेक्ट की जानकारी नहीं मिली.

यह स्टडी नवंबर 2023 से अप्रैल 2025 के बीच किया गया. इसमें 18 से 80 वर्ष की उम्र के ऐसे मरीज शामिल थे, जिन्हें पिछले एक महीने के भीतर मध्यम स्तर का स्ट्रोक हुआ था. 200 से अधिक मरीजों की जांच के बाद 40 मरीजों को चुना गया और उन्हें दो समूहों में बांटा गया.

कैसे निकला रिजल्ट?

एक समूह को सामान्य मेडिकल और रिहैबिलिटेशन देखभाल दी गई, जबकि दूसरे समूह को वही इलाज देने के साथ-साथ 15 दिनों तक एक दिन छोड़कर एक दिन 30 मिनट धूप में बैठाया गया. धूप की तीव्रता को लक्स मीटर से मापा गया और इसे 10,000 से 25,000 लक्स के बीच रखा गया, जो हल्की आउटडोर धूप के बराबर होती है. पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीजों की सुरक्षा पर खास नजर रखी गई.

रिसर्चर का क्या है कहना?

रिसर्चर का मानना है कि धूप शरीर की नींद की लय को सुधारने, विटामिन-D के स्तर को बेहतर करने और सूजन कम करने में मदद कर सकती है, जो स्ट्रोक के बाद रिकवरी के लिए अहम माने जाते हैं. यह रिसर्च न्यूरोलॉजी विभाग की टीम ने किया, जिसमें अवध किशोर पंडित, शिवम मिर्ग और अन्य शोधकर्ता शामिल थे. मरीजों को तीन महीने तक फॉलो-अप में रखा गया और उनकी दैनिक गतिविधियों, मूवमेंट, मूड, नींद और समग्र स्वास्थ्य का आकलन किया गया, हालांकि, ध्यान देने की बात यह है कि यह स्टडी सीमित मरीजों और एक ही केंद्र तक सीमित था.

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टरों का कहना है कि इसके नतीजे अहम हैं, क्योंकि धूप मुफ्त, सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध है. अगर बड़े स्तर पर होने वाले अध्ययनों में भी इसके नतीजे सही साबित होते हैं, तो यह घर पर रिकवरी कर रहे मरीजों और उन इलाकों के लिए खासतौर पर फायदेमंद हो सकता है, जहां रिहैबिलिटेशन सुविधाएं सीमित हैं.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें

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