
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर। दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध और इंटरनेट बंद किए जाने का मामला गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का विषय बना रहा। अदालत ने जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के फैसले पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है।
इस बीच केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी पेश की है। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना नहीं की गई थी।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने पर मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को अधिसूचित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।
मामले में यह सवाल उठाया गया है कि लंबे समय से विरोध प्रदर्शनों के लिए इस्तेमाल होने वाले जंतर-मंतर का दर्जा समाप्त करने का आधार क्या था।
इंटरनेट बंद करने पर गृह सचिव ने पेश की माफी
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी।
हलफनामे के अनुसार, 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक नई दिल्ली के रायसीना हिल्स के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद की गई थीं।
सरकार ने तर्क दिया कि सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया था। साथ ही यह भी कहा गया कि अदालत के निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया।
दिल्ली पुलिस ने भी रखा अपना पक्ष
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने भी अदालत में हलफनामा दाखिल किया। पुलिस ने प्रतिबंधों को कानून-व्यवस्था की परिस्थितियों से जुड़ा बताते हुए अवमानना नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया।
वहीं, प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई और नागरिक अधिकारों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध भी विवाद में
10 अक्टूबर को CJP प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास प्रतिबंधित किया गया था।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अनुसार, 303 में से 45 स्टेशनों पर प्रतिबंधों का असर पड़ा, जबकि निर्धारित ट्रेन सेवाएँ संचालित होती रहीं। DMRC ने भी अदालत के समक्ष माफी पेश की है।
प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन का सवाल
सुप्रीम कोर्ट इससे पहले स्पष्ट कर चुका है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर सार्वजनिक परिवहन और सामान्य जनजीवन पर व्यापक प्रतिबंध लगाने से बचना चाहिए।
अब जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल संबंधी फैसले और 10 अक्टूबर की कार्रवाई पर केंद्र एवं संबंधित एजेंसियों के जवाब के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।
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