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भ्रष्टाचार का ‘पुलिंदा’: सिरोही के बड़गांव में 8 दिन में बना 14.63 लाख का कॉजवे पुल, 8 महीने में ही ढहने की कगार पर; उखड़ा सीमेंट, बाहर निकला जंग लगा सरिया

शिवगंज/सिरोही (विशेष संवाददाता)। सरकारी फाइलों में ‘विकास’ की रफ्तार कितनी भी चमत्कारी दिखाई दे, लेकिन धरातल पर घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की पोल खुलने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। इसका सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण सिरोही जिले की शिवगंज तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़गांव में सामने आया है। यहां खारा महादेव मंदिर के समीप पानी निकासी के लिए करीब 15 लाख रुपये की लागत से बना एक कॉजवे कलवर्ट (पुल) कागजों पर महज 8 दिन में बनकर तैयार हो गया। लेकिन निर्माण के महज 8 महीने बीतते-बीतते यह पुल पूरी तरह जर्जर हो चुका है और कभी भी ढहने की कगार पर है। पुल की छत का सीमेंट-कंक्रीट भरभराकर गिर चुका है और अंदर लगा जंग लगा सरिया हवा में झूलता साफ नजर आ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जनता के गाढ़े पसीने की कमाई और सरकारी बजट को मिलीभगत कर कागजी खानापूर्ति में ठिकाने लगा दिया गया।

कागजों में ‘जादूगरी’: 15 जनवरी को शुरू हुआ काम और 23 जनवरी को पूरा!

पुल की दीवार पर लिखे सरकारी सूचना पट्ट के अनुसार:

  • योजना: राज्य वित्त आयोग षष्ठम (SFC मद, जिला परिषद 2025-26)

  • कार्य का नाम: लोडिया वाला पर पानी निकासी हेतु कॉजवे कलवर्ट निर्माण (देवली बड़गांव)

  • स्वीकृत राशि: ₹14,74,610 (चौदह लाख चौहत्तर हजार छह सौ दस रुपये)

  • व्यय राशि: ₹14,63,239 (चौदह लाख तरेसठ हजार दो सौ उनतालीस रुपये)

  • कार्य शुरू करने की तिथि: 15 जनवरी 2026

  • कार्य पूर्ण करने की तिथि: 23 जनवरी 2026

सूचना पट्ट पर दर्ज ये तारीखें खुद अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। तकनीकी विशेषज्ञों और ग्रामीणों का कहना है कि जिस कॉजवे पुल के कंक्रीट और आरसीसी स्लैब को जमने (Curing) के लिए ही कम से कम 21 से 28 दिन का समय चाहिए होता है, वह पुल नींव की खुदाई से लेकर छत ढलाई और प्लास्टर समेत मात्र 8 दिनों के भीतर कैसे मुकम्मल हो गया?

8 महीने भी नहीं झेल पाया, दरकने लगी छत; कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

पुल के निर्माण को अभी पूरे 8 महीने ही हुए हैं, लेकिन इसकी हालत किसी बरसों पुराने खंडहर जैसी हो गई है। पुल के एक मुख्य स्पैन (कॉलम के ऊपर का हिस्सा) से कंक्रीट का बड़ा हिस्सा टूटकर गिर चुका है। गुणवत्ताहीन निर्माण सामग्री और सीमेंट के बजाय घटिया रेत-बजरी का इस्तेमाल किए जाने के कारण सरिया नंगा हो गया है।

यह मार्ग स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और खारा महादेव मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन का मुख्य जरिया है। अगर कोई भारी वाहन या ट्रैक्टर-ट्रॉली इस पुल से गुजरती है, तो यह किसी भी समय भरभराकर गिर सकता है, जिससे जनहानि की प्रबल आशंका बनी हुई है।

जिम्मेदारों पर उठे सवाल: जांच और वसूली की मांग

लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी चंद महीनों में पुल का जर्जर होना यह साबित करता है कि निर्माण कार्य में न तो तकनीकी मापदंडों का पालन किया गया और न ही जिम्मेदार कनिष्ठ अभियंता (JEN) या सहायक अभियंता (AEN) ने मौके पर उचित मॉनिटरिंग की। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और जिला परिषद सीईओ से मांग की है कि:

  1. इस पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच विजिलेंस या निष्पक्ष जांच कमेटी से करवाई जाए।

  2. 8 दिन में कार्य पूर्ण दिखाकर 14.63 लाख रुपये उठाने वाले संबंधित ठेकेदार, ग्राम विकास अधिकारी और तकनीकी अधिकारियों के खिलाफ गबन व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई हो।

  3. जर्जर हो चुके पुल की तत्काल तकनीकी मरम्मत करवाई जाए ताकि संभावित हादसे को टाला जा सके।

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