
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के नवनिर्वाचित निकाय प्रमुखों को दो-टूक शब्दों में 100 दिन के भीतर शहरों की तस्वीर बदलने का टास्क दिया है। सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CMR) में नगरीय निकायों के नवनिर्वाचित महापौर, सभापति और अध्यक्षों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सीएम ने शहरों के विकास और व्यवस्थाओं को लेकर ‘100 दिवसीय कार्ययोजना’ पर सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनता ने विकास की उम्मीद के साथ स्थानीय शहरी सरकारें चुनी हैं, इसलिए जमीन पर आम नागरिक को व्यवस्था परिवर्तन का स्पष्ट अहसास होना चाहिए।
संवाद कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के सभी 10 नगर निगमों के महापौर प्रत्यक्ष रूप से सीएमआर में उपस्थित रहे, जबकि प्रदेशभर के उप महापौर, नगर परिषदों के सभापति, उप सभापति, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से बैठक से जुड़े।
दीपावली से पहले चमकाएं शहर: 1 माह में पूरे हों मूलभूत काम
त्योहारी सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने निकाय प्रमुखों को आगामी एक माह का विशेष लक्ष्य सौंपा। उन्होंने निर्देश दिए कि दीपावली पर्व से पहले सभी शहरों में:
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सड़कों की मरम्मत और पैचवर्क का कार्य पूरा किया जाए।
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नियमित साफ-सफाई, नालियों व सीवरेज लाइनों की दुरुस्ती सुनिश्चित हो।
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शहर के प्रमुख चौराहों, डिवाइडरों का रंग-रोगन और सार्वजनिक सौंदर्यकरण हो।
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बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को ठीक कर निर्बाध बिजली व्यवस्था कायम की जाए।
‘वार्ड की सीमा से बाहर निकलें, पूरे शहर को इकाई मानकर बने मास्टर प्लान’
मुख्यमंत्री ने शहरी विकास की संकीर्ण सोच पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सड़क, सीवरेज, ड्रेनेज और जलापूर्ति जैसी मूलभूत योजनाओं की प्लानिंग वार्डवार टुकड़ों में नहीं होनी चाहिए।
“पार्षद और निकाय प्रमुख वार्ड की सीमाओं से ऊपर उठें। विकास का खाका पूरे शहर की समग्र आवश्यकताओं और भविष्य की आबादी को ध्यान में रखकर चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाना चाहिए।”
वित्तीय प्रबंधन सुधारें निकाय, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
नगरीय निकायों की माली हालत पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने निकाय प्रमुखों को अपनी वित्तीय निर्भरता कम करने और आय के नए स्रोत विकसित करने के निर्देश दिए:
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कुशल वित्तीय प्रबंधन: निकायों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए टैक्स वसूली और लीज आदि से राजस्व आय बढ़ाने पर जोर दिया जाए।
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पारदर्शिता और जवाबदेही: सभी कार्य पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी से किए जाएं। प्रशासन में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीति पूरी तरह ‘जीरो टॉलरेंस’ की है, इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं होगी।
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