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संत त्रिवेणीगिरी मौत मामला: आक्रोशित साधु-संतों व ग्रामीणों ने घेरा शिवगंज थाना, बैरिकेड्स पर चढ़े लोग; एएसपी के आश्वासन पर एक माह का अल्टीमेटम, 11 नवंबर को फिर आर-पार की चेतावनी
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शहर में निकाली विशाल आक्रोश रैली, थाने के बाहर ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ हुआ राम नाम संकीर्तन; एसपी से वार्ता पर अड़े संत, सिरोही से पहुंचे एएसपी नरेंद्र कुमार

शिवगंज/सिरोही (विशेष संवाददाता)। कामेश्वर (काम्बेश्वर) महादेव मंदिर आश्रम के महंत संत त्रिवेणीगिरी जी महाराज की संदिग्ध मौत और दो-तीन दिन पुराना शव मिलने के मामले में पुलिस की लीपापोती के खिलाफ शनिवार को संत समाज और स्थानीय नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। निष्पक्ष जांच और हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे साधु-संतों और हजारों ग्रामीणों ने शहर में विशाल आक्रोश रैली निकालकर शिवगंज पुलिस थाने का घेराव किया। थाने के बाहर हुए तीखे हंगामे और प्रदर्शन के बाद सिरोही से पहुंचे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) नरेंद्र कुमार से वार्ता हुई। पुलिस द्वारा एफएसएल (FSL) रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई का ठोस भरोसा दिए जाने के बाद संतों ने पुलिस को एक महीने का वक्त देते हुए 11 नवंबर तक का अल्टीमेटम थमाया है।

शहर में निकली विशाल रैली, थाने के बाहर बैरिकेड्स पर चढ़े प्रदर्शनकारी

शनिवार सुबह साधु-संत, हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि और क्षेत्र के ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्र हुए। शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए ‘संत त्रिवेणीगिरी को न्याय दो’ और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एक विशाल रैली निकाली गई।

रैली जब शिवगंज थाने पहुंची, तो पुलिस की ओर से की गई सुरक्षा व्यवस्था के बीच माहौल गरमा गया। आक्रोशित भीड़ में से कुछ युवाओं ने पुलिस बैरिकेड्स को हटाने का प्रयास किया और बैरिकेड्स के ऊपर चढ़ गए। स्थिति बिगड़ती देख वरिष्ठ संतों ने तुरंत दखल दिया और युवाओं को शांत कराते हुए लोकतांत्रिक व मर्यादित तरीके से आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया। इसके बाद सभी साधु-संत और ग्रामीण थाने के मुख्य द्वार के सामने ही धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान ‘जय श्री राम’ के गगनभेदी नारे लगे और संतों ने धरने पर बैठकर राम नाम का संकीर्तन शुरू कर दिया।

                                 

स्थानीय अधिकारियों से वार्ता से इनकार, सिरोही से बुलाए गए एडिशनल एसपी

थाना परिसर में काफी देर तक चले हंगामे और नारेबाजी के बीच स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी संतों से वार्ता करने का प्रयास किया, लेकिन संतों ने दो-टूक मना कर दिया। संतों की स्पष्ट मांग थी कि वे जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसपी) से ही सीधे बात करेंगे और नीचे के स्तर पर कोई समझौता नहीं होगा।

गतिरोध बढ़ता देख जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) नरेंद्र कुमार को तुरंत शिवगंज मौके पर भेजा गया। एएसपी के मौके पर पहुंचने के बाद संतों का प्रतिनिधिमंडल वार्ता की मेज पर बैठा। संतों ने पुलिस की अब तक की सुस्त कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और दोहराया कि संत का चेहरा काला पड़ना, जीभ बाहर निकलना और मौके से संदिग्ध डंडा मिलना सीधे तौर पर नृशंस हत्या की ओर इशारा करता है, जिसे पुलिस सामान्य मौत बताकर दबाने का प्रयास न करे।

FSL रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन, 11 नवंबर का अल्टीमेटम

वार्ता के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र कुमार ने संत समाज और नागरिकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि पुलिस किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष जांच के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण हैं और शव का विसरा व अन्य नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। एफएसएल (FSL) रिपोर्ट आने में करीब एक महीने का समय लग सकता है। एएसपी ने समझाइश करते हुए कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट के बिना जल्दबाजी में कोई भी एकतरफा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन रिपोर्ट मिलते ही कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के इस आश्वासन के बाद संत समाज ने पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष जांच के लिए पूरे एक महीने की मोहलत दी। संतों ने दो-टूक चेतावनी दी कि यदि 11 नवंबर तक एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर सच्चाई सामने नहीं आई और संदेहास्पद कड़ियों की परतें खोलकर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो 11 नवंबर को संत समाज पूरे मारवाड़-गोडवाड़ के सहयोग से दोबारा शिवगंज में बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगा। इसके बाद सभी साधु-संत और ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से रवाना हो गए।

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