
पालिका ने 11 से 20 अक्टूबर तक कत्लखाने व मीट-मछली की दुकानें बंद करने का निकाला आदेश; प्रबुद्ध वर्ग बोला—देर रात तक चलने वाले वैध-अवैध शराब अड्डों से गरबा में झगड़े और मारपीट का खतरा, मदिरा पर भी लगे पूर्ण प्रतिबंध
सुमेरपुर/।शक्ति की उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्रि को लेकर सुमेरपुर नगरपालिका द्वारा जारी एकतरफा आदेश के बाद शहर में प्रशासनिक प्राथमिकताओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा आक्रोश पनप गया है। नगरपालिका प्रशासन ने 11 से 20 अक्टूबर तक पालिका क्षेत्र के सभी कत्लखानों और मांस-मछली की दुकानों को बंद रखने का फरमान तो सुना दिया, लेकिन शराब की खुली बिक्री पर पूरी तरह चुप्पी साध ली।
शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, गरबा आयोजकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि मांस-मछली की दुकानों पर पाबंदी लगाना परंपरा के अनुसार उचित है, लेकिन नवरात्रि जैसे पवित्र पर्व में उससे भी कहीं ज्यादा बड़ा खतरा शराब के ठेकों और देर रात तक चलने वाले अवैध शराब के अड्डों से है। शराब पीकर गरबा पंडालों में घुसने वाले असामाजिक तत्वों के कारण हर साल माहौल खराब होता है और कानून-व्यवस्था बिगड़ती है।
गरबा पंडालों में मां-बहनों की सुरक्षा पर सवाल: नशेड़ियों के हुड़दंग से मारपीट और विवाद का डर
स्थानीय लोगों और गरबा कमेटियों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के दोहरे रवैये पर उंगली उठाते हुए वास्तविक जमीनी स्थिति बयां की:
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गरबा महोत्सव और सुरक्षा का संकट: नवरात्रि के दौरान शहर के गली-मोहल्लों और मुख्य चौराहों पर देर रात तक गरबा और डांडिया रास का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और बच्चे शामिल होते हैं।
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शराबियों की एंट्री से बिगड़ता है माहौल: खुलेआम बिकने वाली मदिरा का सेवन कर असामाजिक तत्व शराब के नशे में धुत होकर इन धार्मिक व सांस्कृतिक पंडालों के आसपास जमा हो जाते हैं। नशेड़ियों द्वारा की जाने वाली फब्तियां, छेड़छाड़ और हुड़दंग के चलते कई बार गंभीर विवाद, मारपीट और खूनी संघर्ष की नौबत आ जाती है।
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मांस की दुकानों से ज्यादा नुकसान शराब से: जागरूक नागरिकों का दो-टूक कहना है कि एक कोने में बंद दुकान में बिकने वाले मांस से गरबा पंडालों की शांति भंग नहीं होती, जितनी खुले घूमते शराबियों और शराब की दुकानों से होती है। ऐसे में कानून-व्यवस्था और नारी सुरक्षा के लिहाज से सबसे पहली पाबंदी मदिरा पर होनी चाहिए।
देर रात तक अवैध बिक्री पर मेहरबानी क्यों?
शहरवासियों ने आरोप लगाया कि सुमेरपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर देर रात तक अवैध रूप से शराब बेची जाती है। यह अवैध कारोबार नवरात्रि जैसे पावन पर्व में खुलेआम ‘नशेड़ी ब्रिगेड’ तैयार करता है, जो रात को पंडालों और सड़कों पर शांति व्यवस्था के लिए सिरदर्द बन जाते हैं।
आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कथित अनदेखी के चलते शराब माफिया बेखौफ हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन सचमुच पर्व की मर्यादा और जनता की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो सबसे पहले देर रात तक चलने वाले इन मदिरा अड्डों पर ताले जड़े जाने चाहिए।
ईओ और अध्यक्ष ने जारी किया था 10 दिन मीट दुकानें बंद रखने का आदेश
गौरतलब है कि नगरपालिका सुमेरपुर के अधिशाषी अधिकारी (EO) नरपतसिंह राजपुरोहित एवं पालिका अध्यक्ष छत्रभुज शर्मा के संयुक्त हस्ताक्षर से आदेश (क्रमांक: न.पा.सु./2026/7930) जारी किया गया है। इसमें स्वास्थ्य एवं सफाई निरीक्षक को 11 से 20 अक्टूबर तक पालिका क्षेत्र में स्थित समस्त कत्लखानों और मांस-मछली विक्रेताओं को दुकानें बंद रखने के लिए पाबंद करने और उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
जनता की मांग: धार्मिक शुचिता और सुरक्षा के लिए शराब पर भी लगे पूर्ण रोक
शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों, युवा मंडलों और गरबा आयोजकों ने उपखंड अधिकारी (SDM), नगर पालिका प्रशासन और पुलिस उपाधीक्षक से पुरजोर मांग की है कि:
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शराब की दुकानों पर प्रतिबंध: नवरात्रि के दौरान धार्मिक भावनाओं और गरबा पंडालों की सुरक्षा को देखते हुए देशी व अंग्रेजी शराब के ठेकों को पूरी तरह बंद करवाया जाए या उनका समय शाम ढलते ही सीमित किया जाए।
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अवैध बिक्री पर सख्त नकेल: रात के समय चोरी-छिपे शराब बेचने वाले ढाबों और अवैध अड्डों पर पुलिस की विशेष टीमें बनाकर ताबड़तोड़ धरपकड़ की जाए।
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पंडालों पर ब्रेथ एनालाइजर से जांच: गरबा स्थलों के आसपास शराब पीकर हुड़दंग मचाने वालों के खिलाफ पुलिस की विशेष पेट्रोलिंग हो ताकि मां-बहनों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित रह सके।
नागरिकों का कहना है कि सिर्फ मीट व्यापारियों पर डंडा चलाकर खानापूर्ति करने के बजाय प्रशासन को कानून-व्यवस्था और धर्म की मर्यादा बचाने के लिए शराबबंदी पर भी साहस दिखाना चाहिए।
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